संवेदना और सांत्वना


जो कुछ भी हो रहा है आस पास आजकल,

क्या दो शब्दों में सिमट कर रह नहीं जाता?


क्यों इतना नहीं हो पाता हमसे की एक गुमसुम से पूछ ले,

सब ठीक तो है ना?

और गर ठीक ना हो तो भी मै हूं,

तुम्हारी सुनने,

ना ये सोचने की तुम छोटी सी बात को दिल पे लगाए बैठे हो,

ना ये जतलाने की तुम्हारा दुख बहुत छोटा है,

बस ये एहसास दिलाने की कोई है जो सुनेगा तुम्हारे दिल की,


पर desperate sound करने का भी तो डर होता है,

जाने कौन जज करे, जाने कैसे troll हो जाए,

इमोशनल होना is so UNCOOL


How can you cry on such small things?

दुनिया से कंधे से कंधा मिलाकर भी तो चलना है,

Coolness का परचम कम नहीं करना है,


तो जिए जा रहे है सब,

अपनी संवेदना मिटाए,

COOL बनते हुए


कोई जिए तो जिए,

कोई मेरे तो मरे,

हमे क्या?

हमारे जीवन में दुख कम है क्या?

कहां कहां अपनी सांत्वना दिखाएं?

किस किस को जतलाए की जीवन कितना अनमोल है?

किस किस को समझाए की तेरा दर्द हम समझेंगे और साथ रहेंगे?


हर किसी के लिए हर कोई नहीं हो सकता,

क्यों ना इस बात को समझा जाए,

और अपने आस पास जो इन सबसे लड़ रहे है,

उनको अकेला और अलग ना समझ कर,

उनका साथ दिया जाए!!


क्यों ना खुद से शुरू किया जाए,

क्यों ना लोगो को एहमियत दी जाए,

क्यों ना खुद के साथ साथ औरो की भी सोची जाए,

किसी को यूहीं हंसाया जाए,

किसी के साथ यू ही रोया जाए,


क्यों ना खुल के बात की जाए इन मुद्दों पर?


वो क्या है ना,

बूंद बूद से बनता सागर है,


तो क्यों ना,


किसी और से पहले खुद को आजमाया जाए.

अपनी संवेदना को साकार किया जाए !!i❤️






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